Friday, November 9, 2012

किसी कवि की कल्पना, रूप का श्रृंगार हो


किसी कवि की कल्पना, रूप का श्रृंगार हो,
इस जमीं पे सौंदर्य का एक मात्र प्रमाण हो,
प्रेम का मैं पथिक भटक रहा था दर-बदर,
इस पथिक के प्रेम की आखिरी तलाश हो,
सात रंग, सात सुर, इन्द्रधनुष में सात हैं,
पर श्रृंगार सौंदर्य का एक तुम वास हो,
भौरे का भमर फूलो का पराग हो,
मेरे दिल बजने वाली एक मात्र साज हो,
किसी कवि की कल्पना, रूप का श्रृंगार हो,
इस जमीं पे सौंदर्य का एक मात्र प्रमाण हो ||

Tuesday, November 6, 2012

प्रेम का आधार


आधार हैं ये प्रेम का
कि सत्य होगी कल्पना
मार्ग हो विकास का
और शांतिमय हो ये धरा
न भाव शत्रु का न बैर की हो भावना
आधार हैं ये प्रेम का
कि सत्य होगी कल्पना ।।

मुलाकात


रोज नया दिन नयी रात होती हैं
बस फासलों से मुलाकात होती हैं
सोचा कभी कम करे फासलों को
तो ख्वाबो में मुलाकात होती हैं