Wednesday, May 27, 2015
Wednesday, March 25, 2015
बड़े हुए तो क्या हुए
बड़े हुए तो क्या हुए
अपना कांशी-काबा भूल गए
जिस छाव में बसती सारी
खुशिया
वो माँ का आंचल भूल गए
याद रही सारी दुनिया घर की
चौखट भूल गए
बड़े हुए तो क्या हुए, अपना
कांशी-काबा भूल गए
जब मशहूर हो गए दुनिया में
अपनी उपलब्धि गिनने लगे
इस उपलब्धि तक लानी वाली वो
बाप की उंगली भूल गए
बड़े हुए तो क्या हुए, अपना
कांशी-काबा भूल गए
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