मेरे दिल की अवाज
Tuesday, July 18, 2017
Wednesday, May 27, 2015
Wednesday, March 25, 2015
बड़े हुए तो क्या हुए
बड़े हुए तो क्या हुए
अपना कांशी-काबा भूल गए
जिस छाव में बसती सारी
खुशिया
वो माँ का आंचल भूल गए
याद रही सारी दुनिया घर की
चौखट भूल गए
बड़े हुए तो क्या हुए, अपना
कांशी-काबा भूल गए
जब मशहूर हो गए दुनिया में
अपनी उपलब्धि गिनने लगे
इस उपलब्धि तक लानी वाली वो
बाप की उंगली भूल गए
बड़े हुए तो क्या हुए, अपना
कांशी-काबा भूल गए
Friday, June 7, 2013
मुहब्बत की शिदत
मुहब्बत चाहें जितनी शिदत करो यारा
मगर नफ़रत को जगह ना दे ,
चन्द लम्हों की दुनिया हैं मुकददर में जहा के ,
उसे मुहब्बत के समुन्दर में शिदत से बिता यारा
Friday, November 9, 2012
किसी कवि की कल्पना, रूप का श्रृंगार हो
किसी कवि की कल्पना, रूप का श्रृंगार हो,
इस जमीं पे सौंदर्य का एक मात्र प्रमाण हो,
प्रेम का मैं पथिक भटक रहा था दर-बदर,
इस पथिक के प्रेम की आखिरी तलाश हो,
सात रंग, सात सुर, इन्द्रधनुष में सात हैं,
पर श्रृंगार सौंदर्य का एक तुम वास हो,
भौरे का भमर फूलो का पराग हो,
मेरे दिल बजने वाली एक मात्र साज हो,
किसी कवि की कल्पना, रूप का श्रृंगार हो,
इस जमीं पे सौंदर्य का एक मात्र प्रमाण हो ||
Tuesday, November 6, 2012
प्रेम का आधार
आधार हैं ये प्रेम का
कि सत्य होगी कल्पना
मार्ग हो विकास का
और शांतिमय हो ये धरा
न भाव शत्रु का न बैर की हो भावना
आधार हैं ये प्रेम का
कि सत्य होगी कल्पना ।।
मुलाकात
रोज नया दिन नयी रात होती हैं
बस फासलों से मुलाकात होती हैं
सोचा कभी कम करे फासलों को
तो ख्वाबो में मुलाकात होती हैं
Subscribe to:
Comments (Atom)